मुख्य संपादक – सैफ अली सिद्दीकी
हल्द्वानी। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों को विकास प्राधिकरण के दायरे में शामिल किए जाने को लेकर विरोध तेज हो गया है।

जिला ग्राम प्रधान संगठन नैनीताल ने इस निर्णय का कड़ा विरोध दर्ज करते हुए माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड सरकार को ज्ञापन प्रेषित किया है।

ग्राम प्रधान संगठन जनपद नैनीताल के जिला अध्यक्ष गोपाल सिंह अधिकारी ने कहा कि यह निर्णय ग्रामीण व्यवस्था और पंचायती राज की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष और चिंता का माहौल उत्पन्न हो रहा है।

ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख आपत्तियाँ
संगठन की ओर से भेजे गए ज्ञापन में कई गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराई गई हैं—
- पंचायती अधिकारों पर प्रभाव: 73वें संविधान संशोधन के तहत ग्राम सभाओं को मिले अधिकार कमजोर होने की आशंका।
- आर्थिक बोझ बढ़ने की चिंता: छोटे-छोटे निर्माण कार्यों के लिए नक्शा पास और शुल्क की बाध्यता से ग्रामीणों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव।
- कृषि कार्यों में बाधा: गौशाला, कृषि शेड और अन्य आवश्यक ढांचों के निर्माण में अनुमति प्रक्रिया से दिक्कतें।
- भ्रष्टाचार और दबाव का डर: ग्रामीण क्षेत्रों में “इंस्पेक्टर राज” जैसी स्थिति बनने की आशंका।
- ग्रामीण संस्कृति पर असर: शहरी मानकों को गांवों पर लागू करने से ग्रामीण जीवन शैली प्रभावित होने की संभावना।

संगठन की प्रमुख मांगें
ग्राम प्रधान संगठन ने सरकार से निम्न मांगें की हैं—
- ग्रामीण क्षेत्रों को विकास प्राधिकरण की सीमा से बाहर रखा जाए
- पंचायतों को पूर्व की भांति विकास कार्यों का पूर्ण अधिकार दिया जाए
- नई नियमावली में ग्राम सभा की सहमति को अनिवार्य किया जाए
संगठन का पक्ष
संगठन का कहना है कि गांवों का विकास पंचायत और पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से ही होना चाहिए। विकास प्राधिकरण की व्यवस्था ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप नहीं है, जिससे “गांव की सरकार” की अवधारणा कमजोर पड़ सकती है।
