टनकपुर में वन भूमि पर कूड़ा डालने का मामला, नगर पालिका के खिलाफ मुकदमा फिर भी जारी डंपिंग

मुख्य संपादक-सैफ अली सिद्दीकी

टनकपुर (चम्पावत)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र चंपावत टनकपुर के वार्ड नंबर 2 में नगर पालिका परिषद का डंपिंग जोन अब केवल बदबू, गंदगी और जलभराव का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और नियमों के पालन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब संबंधित भूमि वन विभाग की है, वन विभाग ने कूड़ा डालने की अनुमति नहीं दी, नगर पालिका के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज है, तो आखिर वर्षों से वन भूमि पर कूड़ा किसके आदेश और किस अधिकार से डाला जाता रहा?

शारदा चौराहे से एनएचपीसी (क्रेशर रोड) तक जाने वाली सड़क बरसात में दलदल में तब्दील हो जाती है। ट्रेंचिंग ग्राउंड से उठने वाली बदबू, धुआं, मृत पशुओं का निस्तारण और चारों ओर फैली गंदगी ने स्थानीय लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। पूर्णागिरि धाम आने वाले श्रद्धालु भी इसी मार्ग से गुजरते हैं और उन्हें भी दुर्गंध व गंदगी का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि 8 से 15 वर्षों से लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन नगर पालिका परिषद ने स्थायी समाधान निकालने के बजाय केवल आश्वासन दिए। बरसात में सड़क तालाब बन जाती है, बच्चे कीचड़ में गिरते हैं, मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है और आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने तक में दिक्कत होती है।

स्थानीय निवासी इशरत का कहना है कि डंपिंग जोन से उठने वाली बदबू के कारण घरों में बैठना मुश्किल हो जाता है। उनका आरोप है कि यहां मृत पशु भी फेंके जाते हैं, जिससे स्थिति और भयावह हो जाती है।

नूर हसीन ने बताया कि आंगनबाड़ी जाने वाले बच्चों को परिजन कंधों पर बैठाकर ले जाने को मजबूर हैं। सड़क और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाएं आज तक नहीं मिल सकीं।

मोहम्मद अनीस ने आरोप लगाया कि लाखों रुपये की योजनाओं की बातें तो हर बार होती हैं, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस हैं। उनका कहना है कि कई बार कूड़े में आग लगी, फायर ब्रिगेड बुलानी पड़ी, फिर भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

नगर पालिका के दावों पर वन विभाग के बयान ने खड़े किए बड़े सवाल

नगर पालिका परिषद कके अधिशासी अधिकारी ऋषभ उनियाल का कहना है कि ट्रेंचिंग ग्राउंड की लगभग 0.5 हेक्टेयर भूमि वन विभाग की है, जिसका हस्तांतरण कराया जा रहा है। वहीं पालिका अध्यक्ष का कहना है कि सड़क भी वन विभाग के अधीन है, इसलिए नगर पालिका उसका निर्माण नहीं करा सकती।

लेकिन दूसरी ओर वन विभाग के बयान नगर पालिका के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

डीएफओ कुंदन कुमार ने स्पष्ट कहा कि वन भूमि पर कूड़ा डालने के मामले में नगर पालिका परिषद टनकपुर के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है और मुकदमा अभी भी चल रहा है। उन्होंने बताया कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत अलग से चल रही है और पूरे मामले की जांच रेंज ऑफिसर से कराई जाएगी।

रेंजर मेधा सिंह ने बताया कि वन विभाग ने पूर्व में नगर पालिका के कूड़ा ढोने वाले वाहनों को भी जब्त किया था और इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था।

एसडीओ शालिनी ने साफ शब्दों में कहा कि वन विभाग की ओर से नगर पालिका को वन भूमि पर कूड़ा डालने की कभी कोई अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी नगर पालिका को ऐसा करने से रोका गया था और केवल भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव भेजा गया है।

अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल

  • जब वन विभाग ने कभी अनुमति नहीं दी, तो वर्षों तक वन भूमि पर कूड़ा क्यों डाला गया?
  • यदि नगर पालिका के खिलाफ मुकदमा दर्ज है, तो उसके बावजूद डंपिंग क्यों जारी रही?
  • यदि सड़क वन विभाग की है और नगर पालिका उसे बना नहीं सकती, तो लोगों को वर्षों से बदहाल सड़क पर चलने के लिए क्यों छोड़ दिया गया?
  • यदि 74 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत हो चुकी है, तो अब तक लोगों को बदबू, धुएं और कीचड़ से राहत क्यों नहीं मिली?
  • इतने वर्षों तक पर्यावरण, स्थानीय आबादी और श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

लोगों की मांग

स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, वन भूमि पर वर्षों तक कूड़ा डाले जाने की जिम्मेदारी तय करने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, ट्रेंचिंग ग्राउंड का तत्काल वैज्ञानिक निस्तारण कराने तथा सड़क, जलभराव और दुर्गंध की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।

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